लखनऊ: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने युवाओं को रोजगार के क्षेत्र में नई ताकत देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्य में कौशल विकास प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे करीब डेढ़ लाख युवाओं को अब मुफ्त प्रोफेशनल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके लिए उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन (यूपीएसडीएम) और आईबीएम स्किल फाउंडेशन के बीच समझौता किया गया है।
इस पहल के तहत यूपीएसडीएम और दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (डीडीयू-जीकेवाई) से जुड़े प्रदेश के लगभग 1000 प्रशिक्षण केंद्रों में युवाओं को आधुनिक तकनीकों की ट्रेनिंग उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार का उद्देश्य युवाओं को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप कौशल प्रदान कर उन्हें रोजगार के बेहतर अवसरों से जोड़ना है।
रोजगार के लिए चलेंगी विशेष प्लेसमेंट ड्राइव
यूपीएसडीएम के मिशन निदेशक पुलकित खरे के अनुसार, इस समझौते का सबसे बड़ा फायदा युवाओं को रोजगार दिलाने में मिलेगा। प्रशिक्षण के बाद बड़े स्तर पर मेगा जॉब फेयर आयोजित किए जाएंगे और विभिन्न कंपनियों के साथ प्लेसमेंट ड्राइव भी चलाई जाएगी।
प्रशिक्षण अवधि के दौरान ही रोजगार उन्मुख गतिविधियों का आयोजन होगा, जिससे युवाओं को उद्योग जगत की कार्यप्रणाली, रोजगार बाजार की मांग और करियर के अवसरों की विस्तृत जानकारी मिल सकेगी।
इंटरव्यू और प्रोफेशनल स्किल्स पर रहेगा फोकस
सरकार सिर्फ तकनीकी प्रशिक्षण तक ही सीमित नहीं रहेगी, बल्कि युवाओं को नौकरी हासिल करने के लिए इंटरव्यू की तैयारी भी कराई जाएगी। करियर वर्कशॉप के माध्यम से संचार कौशल, पेशेवर व्यवहार, आत्मविश्वास निर्माण और कार्यस्थल की अपेक्षाओं से जुड़ा प्रशिक्षण दिया जाएगा।
अधिकारियों का कहना है कि युवाओं को पारंपरिक पाठ्यक्रमों के साथ-साथ एआई जैसी उभरती तकनीकों का ज्ञान देकर उन्हें प्रतिस्पर्धी रोजगार बाजार के लिए तैयार किया जाएगा।
AI और गुड गवर्नेंस पर कार्यशाला आयोजित
इस समझौते के अवसर पर राजधानी स्थित यूपीएसडीएम मुख्यालय में “एआई फॉर पब्लिक सर्विस एंड गुड गवर्नेंस” विषय पर विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशासनिक कार्यों में एआई के उपयोग और उसकी संभावनाओं के बारे में जानकारी दी गई।
निपुण मिशन का दायरा भी बढ़ाया जाएगा
वहीं दूसरी ओर, प्रदेश सरकार ने परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में कक्षा 3 से 5 तक के विद्यार्थियों को भी निपुण बनाने की दिशा में नई पहल शुरू करने का निर्णय लिया है। अब तक निपुण मिशन प्री-प्राइमरी से कक्षा 2 तक सीमित था, लेकिन इसे आगे बढ़ाते हुए 10 नए मानकों को लागू किया जाएगा।
नई व्यवस्था के तहत बच्चों के सामाजिक और भावनात्मक विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। कक्षाओं का वातावरण अधिक सुरक्षित और सकारात्मक बनाया जाएगा। नियमित अभ्यास, सीखने के स्तर का मूल्यांकन, कमजोर छात्रों के लिए विशेष सहायता कार्यक्रम, समूह आधारित गतिविधियां और गणित की पढ़ाई में शिक्षण सामग्री के बेहतर उपयोग पर जोर रहेगा।
इसके अलावा शिक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे बच्चों को स्वतंत्र लेखन, चर्चा आधारित शिक्षण और छोटे-छोटे समूहों में कार्य देकर उनकी समझ और सीखने की क्षमता को मजबूत करें। इस संबंध में बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से आवश्यक आदेश भी जारी कर दिए गए हैं।
